{PDF} Meera Ke Pad Class 11 Summary – मीरा के पद Notes PDF

मीरा

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Meera Ke Pad Class 11 Summary

मीरा के पद (1)

मेरे तो—— तारों अब मोहि

भावार्य इस पद में मीरा कहती है कि उसके जीवन में कृष्ण ही उसके सर्वस्व है। उसने लोक लाज छोड़कर और कुल मर्यादा का बंधन तोड़कर संतों का साथ कर लिया है। उसने अपने आंसुओं से प्रेम की बेल को बढ़ा लिया है उसे कृष्ण का प्रेम ही माखन जैसा मूल्यवान प्रतीत होता है और शेष संसार छाछ जैसा व्यर्थ प्रतीत होती है। वह भक्तों को देखकर प्रसन्न होती है और जगत को देख कर रोती है।

मीरा के पद (2)

पग घुंघरू…… ..मिले अविनाशी ।

भावार्थ

इस पद में मीरा कृष्ण के प्रति अपनी दीवानगी प्रकट करती है। वे अपने नारायण के प्रति पूरी तरह समर्पित हो चुकी है। लोग उसे दीवानी करते हैं कुनबा, कुल नाशी कहते हैं। राणा जी ने उसे विष का प्याला भेजा जिसे मीरा ने हंसते-हंसते पी लिया। मीरा का कहना है कि ईश्वर, भक्ति से सहज ही प्राप्त हो सकते हैं।

Meera Ke Pad Class 11 Question Answer

मीरा को न्यात के लोग क्या कहते है?

मीराबाई को न्यात के लोग कुलनासी कहते थे।

मीरा ने क्या छोड़ दिया?

मीराबाई अन्त में कहती है कि हे! गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले कृष्ण तुम ही अब मुझे इस संसार से पार उतारों। पदः-2 प्रसंगः-प्रस्तुत पद में मीराबाई ने लोकलाज को त्यागकर कृष्ण प्रेम में दीवाना रूप प्रकट किया गया है। उ0-मीरा ने श्रीकृष्ण के प्रेम में मर्यादा आदि छोड़ दिया आँसुओं से सींचकर प्रेम प्राप्त किया।

मीरा कृष्ण प्रेम के विषय में क्या बताती है?

कृष्णप्रेम के विषय में मीरा बताती है कि उसने अपने आँसुओं से कृष्ण प्रेम रूपी बेल को सींचा अब वह बेल बड़ी हो गई है और उसमें आनंद-फल लगने लगे हैं। मीरा भक्तों को देखकर प्रसन्न होती हैं तथा संसार के अज्ञान व दुर्दशा को देखकर रोती हैं। कृष्ण को अपनाने के लिए मीरा ने अपने परिवार की मर्यादा व समाज की लाज को खोया है।

मीरा किसको अपना सर्वस्व मानती हैं तथा क्यों?

मीरा कृष्ण को अपना सर्वस्व मानती हैं; क्योंकि उन्होंने कृष्ण बड़े प्रयत्नों से पाया है। वे उन्हें अपना पति मानती हैं। कृष्ण-प्रेम के विषय में मीरा बताती है कि उसने अपने आँसुओं से कृष्ण प्रेम रूपी बेल को सींचा अब वह बेल बड़ी हो गई है और उसमें आनंद-फल लगने लगे हैं

कृष्ण के प्रति प्रेम के कारण मीरा को क्या क्या अत्याचार सहने पड़े?

मीरा के व्यवहार को उनके ससुरालवाले अपने कुल की मर्यादा के विरुद्ध मानते थे। अत: मीरा को मर्यादित व्यवहार करने के लिए उन्होंने कई बार समझाया और जब वह कृष्ण-भक्ति से नहीं हटीं तो उन्होंने मीरा को मारने का प्रयास किया। राणा (मीरा के ससुर) ने मीरा को मारने के लिए ज़हर का प्याला भेजा जिसे मीरा हँसते-हँसते पी गई।

मीरा का कृष्ण से क्या संबंध था?

मीराबाई के बालमन में कृष्ण की ऐसी छवि बसी थी कि यौवन काल से लेकर मृत्यु तक मीरा बाई ने कृष्ण को ही अपना सब कुछ माना. जोधपुर के राठौड़ रतनसिंह जी की इकलौती पुत्री मीराबाई का जन्म सोलहवीं शताब्दी में हुआ था. बचपन से ही वे कृष्ण-भक्ति में रम गई थीं. मीराबाई का कृष्ण प्रेम बचपन की एक घटना की वजह से अपने चरम पर पहुंचा था.

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